उस दिन....
उस दिन मैंने सूरज पे भी,
चाँद का नशा छाते देखा था
मैंने दिन को भी,
साँझ पहलू में जाते देखा था
जब बरसीं थी,
वो बारिश की पहली बूंदे
और उस छोटी सी बदली में,
तुझे नहाते देखा था
उस दिन....
उस दिन मैंने सूरज पे भी,
चाँद का नशा छाते देखा था
मैंने दिन को भी,
साँझ पहलू में जाते देखा था
वो तेरे बालों की लचक,
और दबे होंटों की हंसी
कुदरत को भी तुझपे,
अपना नूर बहते देखा था
उस दिन....
उस दिन मैंने सूरज पे भी,
चाँद का नशा छाते देखा था
मैंने दिन को भी,
साँझ पहलू में जाते देखा था
जाने कितने अरमां उठे थे दिल में,
जाने कितनी अंगड़ाइया लेकर
और जाने कितने चाहने वालों को,
अपने अरमां दबाते देखा था
उस दिन....
उस दिन मैंने सूरज पे भी,
चाँद का नशा छाते देखा था
मैंने दिन को भी,
साँझ पहलू में जाते देखा था
जब बरसीं थी,
वो बारिश की पहली बूंदे
और उस छोटी सी बदली में,
तुम्हे नहाते देखा था....!
Wednesday, May 12, 2010
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वो बारिश की पहली बूंदे
ReplyDeleteऔर उस छोटी सी बदली में,
तुम्हे नहाते देखा था
बहुत अच्छे प्रियंक भाई..
thanks sir ji..
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