Tuesday, April 13, 2010

आइना....


पूछा जो आइने से,
तो कुछ न बोला आइना...
देखा जो आइने में,
तो हुआ खुद से सामना...
सामना क्या था,
नजरों में गिर गए...
खुली किताब थी,
पन्ने बिखर गए...
देखा तो अँधेरा था,
और कुछ न था मुझ में...
झाँका जो गिरेबां में,
खली खडा था मैं...

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