नज़रों को झुकाके,
इज़हार मत करना
कभी तू मुझसे,
प्यार मत करना
मैं तो दरिया हूँ,
निकल जाऊंगा
कभी तू मुझपे,
एतबार मत करना..!
ऐ ज़िन्दगी बे-मुरब्बत,
ये कैसा सवाल रक्खा
वहां खुशियाँ बदहाल रक्खीं,
यहाँ गम को बहाल रक्खा..!
उन किस्तियों को कभी,
किनारा नहीं मिलता
जिन किस्तियों को,
मंजिले गवारा नहीं होतीं..!
गर मेरी दुआओं में असर होता,
तो मेरा तेरे दिल में रहगुजर होता
पाटती न दुनियां कभी इश्क की देहरी,
गर मजनू की आशिकी में थोडा और असर होता..!
Wednesday, May 12, 2010
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