Tuesday, April 13, 2010

आइना....


पूछा जो आइने से,
तो कुछ न बोला आइना...
देखा जो आइने में,
तो हुआ खुद से सामना...
सामना क्या था,
नजरों में गिर गए...
खुली किताब थी,
पन्ने बिखर गए...
देखा तो अँधेरा था,
और कुछ न था मुझ में...
झाँका जो गिरेबां में,
खली खडा था मैं...

Wednesday, April 7, 2010

दिख सावन सुखो जाए रे....


दिख सावन सुखो जाए रे
जियरा कछु न भए रे
बस बैठ किनारे नदियन के
मोहे याद तिहारी आए रे
सुन टेक झरोखा खोलत हूँ
सब पूछत कछु न बोलत हूँ
मोरी प्यासी काया रे प्यासों तन
को अधरन की प्यास बुझाए रे
दिख सावन सुखो जाए रे........
चित यौवन झलकत गगरी सो
मन तरसत देखो सबरी सो
पल पलक न झपकत रतियन मे
और न बिछोनन पे सिलबट आए रे
दिख सावन सुखो जाए रे......

Wednesday, March 10, 2010

अनचाहे गम.....


अनचाहे गम चले आए,
बेचौखट चार दिवारी में !
खुशियाँ सारी लूट गए,
न ताले थे अलमारी में !
बेफिकरी हम पर इतनी थी
न रख पाए खुशियों को हम!
गुलशन सारे रूठ गए,
एक माली की नाकारी में !
और सीना तान खड़े होकर,
इतराते थे जिस ताकत पर!
वो दोनों हाथ कटे निकले,
हम खड़े रहे लाचारी में !
अनचाहे गम चले आए
बेचौखट चारदिवारी में ..........!

Tuesday, March 9, 2010

चाहता है...


ये सफ़र जाने क्यूँ ,
इम्तिहान चाहता है...
ये रिश्ता भी नया,
एक नाम चाहता है...
बैठे हैं साहिल पे,
यूं ही तन्हा...
फिर भी लहर का कतरा,
उससे मेरी पहचान चाहता है...
डूबा जाने कितनी मर्तबा,
गहराइयों मैं उसकी...
पर ये मेरी गर्दिशी समझो,
अनजान चाहता है...
बोल लवों से कुछ भी,
कहता नहीं है...
पर दूर खड़ा रह मुझसे,
बस मिलने का अरमान चाहता है...
ये सफ़र जाने.........
ये रिश्ता जाने.........