Wednesday, May 26, 2010

तेरी राहें...


उन राहों पे जाना गवारा नहीं
जिन राहों पे ठिकाना तुम्हारा नहीं
लोग रहते हैं अदद वहां भी मगर
पर किसी से भी अपना याराना नहीं
मन को मनाया बहुत और सताया बहुत
और न माना तो हमने डराया बहुत
पर दिल यूं तडपा और बोला
बस अब जाना दुबारा नहीं
उन राहों पे...
जिन राहों पे...

1 comment:

  1. बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

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