Thursday, December 23, 2010

कारवां...


कारवां चलता रहा,
मैं खामखाँ जलता रहा...
शिरकत किया न चाल में,
हाँथ बस मलता रहा...
एक टक देखा किया,
आँख भर कुछ न लिया...
और सपने बटोरे अर्श से,
बस उनको ही तलता रहा...
कारवां चलता रहा,
मैं खामखाँ जलता रहा...

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