
अनचाहे गम चले आए,
बेचौखट चार दिवारी में !
खुशियाँ सारी लूट गए,
न ताले थे अलमारी में !
बेफिकरी हम पर इतनी थी
न रख पाए खुशियों को हम!
गुलशन सारे रूठ गए,
एक माली की नाकारी में !
और सीना तान खड़े होकर,
इतराते थे जिस ताकत पर!
वो दोनों हाथ कटे निकले,
हम खड़े रहे लाचारी में !
अनचाहे गम चले आए
बेचौखट चारदिवारी में ..........!
