Friday, May 6, 2011

अब तो..

अब तो सांस भी
तेरी मर्ज़ी से चलती है,
तू रोक दे तो
न दिल ग़मज़दा होगा..
रख दे हाथ इस दिल पर
इकबार शिद्दत से,
दर्दे दिल तो इस दिल का
पल में यूं हवा होगा..
बैठा देहरी पर काफ़िर
बस क़त्ल होने की,
दीदारे इश्क हो जाए
तोफिर ज़िबा होगा..
लिख दे लव से माथे पर
किस्मत आज दिलवर की,
गर दे आंच साँसों की
तो कतरा भी खुदा होगा..
अब तो ....

ये अहसास..

तूने कब ये अहसास समझा था
मेरी हर बात को फांस समझा था..
चित गिरा साख से पत्ते जैसा
तूने कब मेरी मौजूदगी को पास समझा था..
जब गिरा होंटों पे बारिश का कतरा
पोंछ दिया तूने कब मेरी प्यास को समझा था..
सांझ होते ही चिराग जला न सका काफिर
तूने तो रोशनी को भी चहरे पे आंच समझा था..
तूने कब ये अहसास समझा था..

Friday, January 14, 2011

नाकाफी...

कतरा बहा जो आब का
तर नाकाफी आँख थी...
सेंका किया जो हाथ जूं
राख में न आंच थी...
लव हुए बेवाक जब
शुष्ख सांसें रह गईं...
महका चमन वो आ गए
तन था नाकाफी साँस थी...

Thursday, December 23, 2010

कारवां...


कारवां चलता रहा,
मैं खामखाँ जलता रहा...
शिरकत किया न चाल में,
हाँथ बस मलता रहा...
एक टक देखा किया,
आँख भर कुछ न लिया...
और सपने बटोरे अर्श से,
बस उनको ही तलता रहा...
कारवां चलता रहा,
मैं खामखाँ जलता रहा...

Thursday, June 3, 2010

कल्पनाओं की उडान...


पंछी सा उड़ सकूँ
कह सकूँ हवा से
नदिया सा बह सकूँ
बातें करूँ फिजा से
तारों सा चमक सकूँ
सूरज सा दमक सकूँ
पवन पर सैर करूँ
मछली सा तैर सकूँ
फिर सोचा, इतने सारे
इतने सारे अरमान हैं
दिल ये बोला,
बहुत कम हैं बहुत कम हैं
ये तो तेरी कल्पनाओं की उडान है

Wednesday, May 26, 2010

तेरी राहें...


उन राहों पे जाना गवारा नहीं
जिन राहों पे ठिकाना तुम्हारा नहीं
लोग रहते हैं अदद वहां भी मगर
पर किसी से भी अपना याराना नहीं
मन को मनाया बहुत और सताया बहुत
और न माना तो हमने डराया बहुत
पर दिल यूं तडपा और बोला
बस अब जाना दुबारा नहीं
उन राहों पे...
जिन राहों पे...

मेरे अहसास .....

कैसे छुपाएँ किसको बताएं
इस जिंदगी में कितने राज़ हैं...
बेसुद हल जाने कितने सवाल
पर हर पल तुझे पाने की आस है...
दिल मसरूफ सितम भी खूब
फिर भी तेरे होने का अहसास है...
शुष्क साँसें करकस आबाज़
जिस्म तन्हां रूह में भी प्यास है...
मुश्किल रह हर कदम पर आह
लेकिन तेरा भरोसा तो मेरे पास है...