Thursday, June 3, 2010

कल्पनाओं की उडान...


पंछी सा उड़ सकूँ
कह सकूँ हवा से
नदिया सा बह सकूँ
बातें करूँ फिजा से
तारों सा चमक सकूँ
सूरज सा दमक सकूँ
पवन पर सैर करूँ
मछली सा तैर सकूँ
फिर सोचा, इतने सारे
इतने सारे अरमान हैं
दिल ये बोला,
बहुत कम हैं बहुत कम हैं
ये तो तेरी कल्पनाओं की उडान है